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सक्ती में रामराज्य था और अब भी रामराज्य ही है , बस फ्लैक्स छोटा हो गया और समस्याएं बड़ी हो गई

सक्ती में रामराज्य था और अब भी रामराज्य ही है , बस फ्लैक्स छोटा हो गया और समस्याएं बड़ी हो गई
सक्ती 25 सितंबर 2024 - छत्तीसगढ़ में सत्ता बदली , जांजगीर चाम्पा लोकसभा मे सांसद भी बदले लेकिन सक्ती वालो के ना तो दशा बदली और ना दिशा। सक्ती में पहले भी रामराज्य था और अब भी रामराज्य ही है। वैसे कहने को तो सक्ती जिला बन गया लेकिन हालात पहले से बदतर हो गए। सक्ती के जिला बनने से लोगो को लगा था कि शहर का विकास होगा , बड़े अधिकारीयो के बैठने से लोगो की समस्याओं का जल्द निपटारा होगा , बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी।

लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा कुछ नही हुआ बस चेहरे बदल गए और बदल गया वसूली का तरीका। हमे आज भी याद है  जब सक्ती के लोग पानी , नाली , सड़क , खेल मैदान जैसे बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे थे और आज भी हालात कमोबेश वैसा का वैसा ही है। लोगो को आज भी इन सब सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।

छत्तीसगढ़ में जब भाजपा की सरकार थी और सक्ती में भाजपा का विधायक थे तब कांग्रेसी कहा करते थे कि भाजपा की सरकार निकम्मी है सक्ती के लिए कुछ नही कर रही है।  05 साल बाद सत्ता बदली छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनी विधायक कांग्रेस के ही बने लेकिन विकास ऐसा गुम था कि मिला ही नही। इस दौरान पानी पी-पी कर भाजपा को कोसने वाले कांग्रेसियों के मुंह पर ताला लटक गया।

05 साल बाद एक बार फिर सत्ता बदली लेकिन विधायक जी वही के वही रहे। अब आलम यह है कि सक्ती विधायक कांग्रेस के है और छत्तीसगढ़ में सरकार भाजपा की है लेकिन विकास अब भी लापता का लापता ही है। दुर्भाग्य यह है कि अब विकास को तलाश करने की जहमत ना तो सत्ता पक्ष उठा रही है और ना विपक्ष।

अब इन दोनों की आपसी खींचतान का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। सक्ती शहर में बदलाव की बयार बस इतनी बही की शहर के चौक चौराहों में लगने वाले फ्लैक्स की साईज छोटी हो गई और आम जनता की समस्या बड़ी हो गई है। एक बुद्धिजीवी ने 05 साल पहले कहा था कि जिस दिन सक्ती में लगने वाले बैनर पोस्टर छोटे होने लग जाएंगे तब समझ लेना कि रामराज्य आ रहा है।