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छत्तीसगढ़ - महादेव सट्टा एप कैसे करता है काम और कौन है इसका मालिक सौरभ चंद्राकर , पढ़े एक क्लिक पर

छत्तीसगढ़ - महादेव सट्टा एप कैसे करता है काम और कौन है इसका मालिक सौरभ चंद्राकर , पढ़े एक क्लिक पर
रायपुर 12 अक्टूबर 2024 - महादेव सट्टा एप के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को इंटरपोल ने दुबई में गिरफ्तार कर लिया है। कानूनी प्रक्रियाओं के बाद एक हफ्ते के अंदर भारत सरकार को सौरव चंद्राकर का प्रत्यर्पण किया जाएगा। इसके बाद सौरभ चंद्राकर को रायपुर लाया जाएगा। महादेव सट्टा एप का मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है। वह दुबई में रहकर महादेव एप सट्टा के कारोबार को संचालित करता था।

महादेव सट्टा एप को छत्तीसगढ़ के भिलाई में रहने वाले सौरभ चंद्राकर ने अपने दोस्त रवि उप्पल के साथ मिलकर बनाया है। सौरभ चंद्राकर के पिता नगर निगम के पेट्रोल पंप में पेट्रोल भरने का काम करते थे। जबकि सौरभ चंद्राकर जूस की दुकान लगाता था। जूस की दुकान लगाते लगाते वह सट्टा खिलाने लग गया था। इसके बाद अपने दोस्त रवि उप्पल के साथ मिलकर महादेव ऑनलाइन सट्टा बुक ऐप बना लिया। रवि उप्पल के पास इंजीनियरिंग की डिग्री है।

बाद में रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर दुबई शिफ्ट हो गए और वही से इसका संचालन करने लगे। उसके साथ ही भिलाई का पिंटू उर्फ शुभम सोनी जुड़कर दुबई चला गया।इस एप के लिए सिंडिकेट को चलाने के लिए टेक्निकल टीम, एकांउट ग्रुप, हेड ऑफिस ग्रुप, कस्टमर केयर,स्टोर डिपार्टमेंट, हेड ऑफिस डिपार्टमेंट नामक अलग अलग विभाग बनाए गए थे। सभी ग्रुप के अलग अलग एडमिन होते थे और सट्टा पैनल एप का संचालन करते थे।

क्या है सट्टा एप और कैसे करता है काम..

महादेव बेटिंग एप ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए बनाया गया है। इस एप के जरिए ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता है। इस पर लॉगइन करने वाले यूजर्स कार्ड गेम्स, पोकर, चांस गेम्स, क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस, फुटबॉल जैसे खेल ऑनलाइन पैसे लगाकर खेले जाते थे। इस ऐप को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि इसमें पैसे लगाकर गेम खेलने वाले यूजर्स जीतते थे। 

लत लगने के बाद जब यूजर्स मोटी रकम लगाने लगते थे तब उन्हें हार का सामना करना पड़ता था। इस ऐप को इस तरह डिजाइन कर दिया गया था कि लगातार खेलने वाले सिर्फ 30 फीसदी यूजर जीतते बाकी हार जाते थे। रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर इसके लिए फ्रेंचाईजी बांटते थे। जिसमे 80% खुद रखते थे। 20 प्रतिशत फ्रेंचाईजी को देते थे।